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‎बारिश‬

ऐ ‪‎बारिश‬ जरा खुलकर बरस, ये क्या ‪‎तमाशा‬ है! इतनी ‪‎रिमझिम‬ तो रोज, किसी की ‪‎आंखो‬ से होती है!!
इस बार ‪‎बरस‬ जाये ‪‎ईमान‬ की ‪‎बारिश‬ , ----लोगों_के ‪‎जमीर‬ पर ‪‎धूल‬ बहुत_है!
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